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जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापस लौटते हैं, तो उन्हें अक्सर ऑर्थोस्टैटिक इनटॉलरेंस (Orthostatic Intolerance) का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब है कि उनका शरीर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में सीधे खड़े होने के दौरान रक्तचाप और रक्त प्रवाह को सामान्य रूप से नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस करता है।
अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण शरीर धीरे-धीरे उस वातावरण के अनुसार ढल जाता है। इससे पैरों की मांसपेशियाँ कमजोर हो सकती हैं और हृदय तथा रक्त-संचार प्रणाली में भी बदलाव होते हैं।
पृथ्वी पर लौटने के बाद अचानक खड़े होने पर रक्त शरीर के निचले हिस्से में अधिक जमा हो सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर गिर सकता है और चक्कर, कमजोरी या कभी-कभी बेहोशी भी हो सकती है।
शरीर को फिर से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुसार पूरी तरह अनुकूल होने में कुछ समय लग सकता है।
यह घटना दिखाती है कि अलग-अलग गुरुत्वाकर्षण वातावरणों के बीच मानव शरीर के लिए बदलाव कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।



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