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$$ जनाब ने जुल्फें भी क्या खूब पाई है, मासूम सा चेहरा, उस पर खुले जुल्फों, झील सी आंखों से कातिल अदाएं पाई है कभी खुद के हाथों से जुल्फों को, तो कभी आंखों कि शरारत से खुले जुल्फों से अपने खूबसूरत चेहरे को छुपाते, पर खूबसूरत चांद छुपे बादलों से भी चांदनी बिखेरती है।।$$ @mit $$
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