भूमध्य रेखा (Equator) पर खड़े होकर, जो पृथ्वी को उत्तरी और द
भूमध्य रेखा (Equator) पर खड़े होकर, जो पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है, एक ही समय में दोनों गोलार्धों में होना अपने आप में बेहद आनंददायक और रोमांचकारी अनुभव था। 🇺🇬
लेकिन इससे भी अधिक आश्चर्यजनक यहाँ Coriolis Effect (कोरिओलिस प्रभाव) का प्रदर्शन था। भूमध्य रेखा के पास तीन बर्तन रखे गए—एक उत्तरी गोलार्ध में, एक दक्षिणी गोलार्ध में और एक बिल्कुल भूमध्य रेखा पर।
जब उनमें पानी डाला गया, तो दोनों गोलार्धों में पानी के घूमने की दिशा अलग-अलग दिखाई गई, जबकि भूमध्य रेखा पर रखे बर्तन में पानी बिना किसी स्पष्ट घूर्णन के सीधे नीचे निकल गया।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इतने छोटे बर्तनों में किया गया ऐसा प्रदर्शन Coriolis Effect का निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसलिए मैंने यह भी पूछा कि कहीं इसमें कोई चाल या तरकीब तो नहीं है। फिर भी, अपनी आँखों के सामने ऐसा होते देखना बेहद रोमांचक और आकर्षक अनुभव था।
एक ही समय में उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों में कदम रखना… यह एहसास अपने आप में अविस्मरणीय है। 🌍
अगर आप कभी Uganda जाएँ, तो वहाँ स्थित Equator को देखना और इस अनुभव को महसूस करना बिल्कुल न भूलें। 🇺🇬



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