सरकारी अस्पतालों में हर डॉक्टर लापरवाह नहीं होता, लेकिन मरीज

Author

Sohail gupta

12-01-2026

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सरकारी अस्पतालों में हर डॉक्टर लापरवाह नहीं होता, लेकिन मरीजों की अत्यधिक संख्या, समय और संसाधनों की कमी के कारण कई बार डॉक्टर पूरी तरह जाँच-पड़ताल करने के बजाय तय प्रोटोकॉल पर चलते हैं और दवाओं का सिर्फ़ composition देखकर generic दवाएँ लिख देते हैं, जो हमेशा गलत नहीं बल्कि अक्सर मजबूरी होती है; सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को MRI या अन्य जाँच से सीधा कमीशन नहीं मिलता, फिर भी कुछ मामलों में निजी जाँच केंद्रों से गठजोड़ के आरोप सामने आए हैं, जो पूरे सिस्टम की खामी है न कि सभी डॉक्टरों की, वहीं दवा निर्माण कंपनियाँ खासकर निजी क्षेत्र में डॉक्टरों को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं ताकि महंगी brand दवाएँ लिखी जाएँ, हालांकि सरकारी अस्पतालों में इसका असर अपेक्षाकृत कम होता है; कुल मिलाकर समस्या व्यक्तिगत से ज़्यादा व्यवस्था की है, और मरीज अगर जागरूक रहकर सवाल पूछे, ज़रूरत न होने पर अनावश्यक जाँच से बचे और संदेह होने पर दूसरी राय ले, तो ऐसी लापरवाही और शोषण को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इसीलिए सभी दवाई , जॉच की पारदर्शिता , और निर्मताओं पे गहन जॉच होनी चाहिए।

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Comments
User
bob smith 12-03-2026 01:57

Awesome content!

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raju verma 12-03-2026 02:12

Really good post!

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Aleksander Babicki 12-03-2026 02:12

Nice post!

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