भारत में जनगणना (Census) हर 10 वर्ष में की जाती है। यदि शुर
भारत में जनगणना (Census) हर 10 वर्ष में की जाती है।
यदि शुरुआत से देखें, तो प्रमुख जनगणनाएँ इन वर्षों में हुईं:
* 1872 – पहली जनगणना (पूरे देश में एक साथ नहीं हुई थी)
* 1881 – पहली नियमित और पूरे भारत में एक साथ जनगणना
* 1891
* 1901
* 1911
* 1921
* 1931
* 1941
* 1951 (स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना)
* 1961
* 1971
* 1981
* 1991
* 2001
* 2011 (अब तक की अंतिम पूर्ण जनगणना)
यदि जातीय (कास्ट) जनगणना की बात करें, तो:
* 1872: पहली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी जुटाई गई थी, लेकिन यह पूरे देश में एक साथ नहीं हुई।
* 1881 से 1931: ब्रिटिश शासन के दौरान हर नियमित जनगणना में सभी जातियों का विवरण दर्ज किया गया।
* 1931: यह भारत की अंतिम पूर्ण जातीय जनगणना थी, जिसके आँकड़े व्यापक रूप से प्रकाशित हुए।
* 1951 के बाद: स्वतंत्र भारत में सभी जातियों की गणना बंद कर दी गई। केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गणना हर जनगणना में होती रही।
* 2011: सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) कराई गई, लेकिन यह सामान्य जनगणना का हिस्सा नहीं थी और इसके जाति संबंधी आँकड़े आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए।
* 2027: सरकार ने घोषणा की है कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना में फिर से सभी जातियों की गणना शामिल की जाएगी।



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