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Breaking news: “Normalisation के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल”
इस मुद्दे के प्रमुख सवाल:
1. क्या छात्रों को उनके वास्तविक प्रदर्शन के अनुसार अंक मिल रहे हैं?
2. नॉर्मलाइजेशन का पूरा फॉर्मूला सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
3. कठिन और आसान शिफ्ट के अंतर का वैज्ञानिक आधार क्या है?
4. क्या छात्रों को अपनी Normalized Marks की गणना जांचने का अधिकार नहीं होना चाहिए?
5. यदि गणना में गलती हो तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
6. Correction के नाम पर हो रही ऑनलाइन धोखाधड़ी। इसका ज़िम्मेदार कौन?
सबसे महत्वपूर्ण बात:
किसी विद्यार्थी की वर्षों की मेहनत, आर्थिक संघर्ष और भविष्य का फैसला ऐसी परीक्षा प्रणाली से नहीं होना चाहिए जिसकी गणना पर ही सवाल उठ रहे हों।



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