चली आओ खिड़की पर जुल्फें संवारते हुए, ताकि शाम आज की कुछ तो ह
चली आओ खिड़की पर जुल्फें संवारते हुए,
ताकि शाम आज की कुछ तो हसीन बने...✍️
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