बॉलीवुड से कहीं गुना अधिक कास्टिंग काउच तो राजनीति में है।
बॉलीवुड से कहीं गुना अधिक कास्टिंग काउच तो
राजनीति में है। बस महिलाएं खुद अपनी मर्जी से
इसका हिस्सा बनती आ रही हैं, इसे जनता चाहे तो
आपसी सहमति से किया गया लेनदेन मान सकती है।
जिसमे दोनों ही पक्षों ने अपने अपने लाभ के लिए एक दूसरे को मनचाही चीज देने का वादा किया, और लेनदेन पूरा हुआ।
ये सबकुछ विशुद्ध व्यापार से अधिक कुछ भी नहीं पर मन मांगी मुराद पूरी होने के बाद महिला के पास एक प्रिविलेज हमेशा होता है कि वो अपने डील पार्टनर पुरुष पर जब चाहे तब शोषण का आरोप लगा सकती है, क्योंकि वो तो अब एक पीड़िता है और पुरूष उसका शोषण करने वाला एक लम्पट, हब्शी अपराधी।
आदमी भी मूर्ख होते हैं, हज़ारों लाखों ऐसे प्रकरण हो चुके फिर भी जिस्मानी भूख के लिए अपने चरित्र दाव पर लगाने से बाज नहीं आते,
जबकि इस कलयुग में स्त्री को
कोई अग्निपरीक्षा नहीं देनी है।
वो अपने गुलाबी गालों पर रलकते मोटे-मोटे
आंसुओं से आधे संसार को पिघला सकती है,
और यक़ीन करें हर कोई उसे पीड़िता मान भी लगा।
जो नहीं मानेंगे उन्हें बाद के कुछ दिन में उठने वाली
नारीवादी लपटों को देखकर मानना ही पड़ेगा।😅



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