शंका का कोई "इलाज" नहीं..चरित्र का कोई "प्रमाण" नहीं..मौन से
शंका का कोई "इलाज"
नहीं..चरित्र का कोई
"प्रमाण" नहीं..मौन से अच्छा
कीई "साधन" नहीं..और
शब्द से तीखा कोई "बाण नही।
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