Ownmates Post
लाला लाजपत राय को आमतौर पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने “लाल-बाल-पाल” तिकड़ी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय समाज सुधार, शिक्षा और स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया। हालांकि, उनके विचार और कार्यों को लेकर दलितों के संदर्भ में कुछ आलोचनाएं सामने आती हैं, इसलिए आइए इस विषय को ऐतिहासिक संदर्भ में समझते हैं।
क्या लाला लाजपत राय दलित-विरोधी थे?
सीधे तौर पर कहा जाए तो:
ऐसे कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं जो यह दिखाएं कि लाला लाजपत राय दलितों के खिलाफ़ थे या उन्होंने उनके खिलाफ कोई विशेष आंदोलन किया हो।
लेकिन वे संसद में द्लितों के विरोध में कहा कि क्या तेली चमेली , कुर्मी यहाँ बैठकर क्या करेंगे। उनका काम जाति के आधार पर बाट दिया गया है।
यह भी सही है कि उन्होंने जातिवादी ढांचे के खिलाफ कोई ठोस रुख नहीं अपनाया या अस्पृश्यता के विरुद्ध वैसा संघर्ष नहीं किया जैसा बाद में डॉ. अंबेडकर जैसे नेताओं ने किया।



Comments
No comments yet.