बहिष्कृत हितकारिणी सभा (Bahishkrit Hitkarini Sabha) की स्थाप
बहिष्कृत हितकारिणी सभा (Bahishkrit Hitkarini Sabha) की स्थापना डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 1924 में की थी। यह सभा विशेष रूप से भारत के उस समय के अछूत (दलित) और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए काम करने हेतु बनाई गई थी।
बहिष्कृत हितकरिणी सभा का मुख्य उपदेश या उद्देश्य:
“शिक्षा प्राप्त करो, संघटन बनाओ और संघर्ष करो।”
(यह डॉ. अंबेडकर का मूलमंत्र भी था।)
मुख्य उद्देश्य:
1. शिक्षा का प्रचार-प्रसार – दलितों और बहिष्कृत समुदायों में शिक्षा को बढ़ावा देना।
2. सामाजिक सुधार – छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानताओं को खत्म करना।
3. राजनीतिक अधिकार – वंचित वर्गों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना।
4. आर्थिक सुधार – दलितों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना।
5. स्वाभिमान और आत्मसम्मान – दलितों को आत्मगौरव और समानता की भावना से प्रेरित करना।
यह सभा दलितों के उत्थान के लिए पहला संगठित सामाजिक प्रयास थी, जिसने आगे चलकर दलित आंदोलन की नींव रखी।



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