क्या है अनुच्छेद 368 का मुख्य उद्देश्य भारत के संविधान में स
क्या है अनुच्छेद 368 का मुख्य उद्देश्य भारत के संविधान में संशोधन करना
संविधान संशोधन अनुच्छेद 368
अनुच्छेद 368 भारतीय संविधान के भाग 20 में है और इसका मुख्य विषय “संविधान का संशोधन” है। यह संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति और प्रक्रिया प्रदान करता है। संसद किसी भी प्रावधान को जोड़, बदल या हटा सकती है, लेकिन इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है:
• संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
• दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए।
• राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद संशोधन लागू होता है।
• कुछ संशोधनों के लिए, संसद के अलावा, राज्यों की विधानसभाओं की भी सहमति आवश्यक होती है (जैसे संघ-राज्य संबंध, उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालयों की शक्तियाँ आदि)।
संविधान संशोधन की संसद की शक्ति असीमित नहीं है—संविधान के “मूल ढांचे” (Basic Structure) को नहीं बदला जा सकता, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने केशवानंद भारती केस (1973) में स्पष्ट किया था।
संक्षेप में:
अनुच्छेद 368 संसद को संविधान संशोधन की शक्ति और उसकी प्रक्रिया बताता है, लेकिन “मूल ढांचे” की सुरक्षा न्यायिक समीक्षा



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