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भारत राज्य के कई जगहों पर यह देखा गया है कि कुछ डॉक्टर या मेडिकल संस्थान मुनाफ़े के उद्देश्य से MRI या जाँचों के आधार पर बिना पूरी क्लिनिकल जाँच किए केवल दवाओं की composition देखकर ही मरीजों को दवा दे देते हैं। कई बार नक़ली या कम असर वाली दवाएँ भी इस प्रक्रिया में शामिल हो जाती हैं, जिससे मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाता। यह प्रवृत्ति ज़्यादातर प्राइवेट सेक्टर में देखने को मिलती है और खासकर उन शहरों या क्षेत्रों में अधिक फैलती है जहाँ स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता कम होती है। अशिक्षा और जानकारी की कमी का फ़ायदा उठाकर मरीजों से अनावश्यक जाँच और दवाओं के ज़रिये पैसा कमाया जाता है, जो कि चिकित्सा नैतिकता के विरुद्ध ख़िलाफ़ है इसमें सर्वोच्य न्यायलयों को गहराई से गहन जॉच करना होगा। और कड़े नियम क़ानून बनाने होंगे।



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