बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को प्रथम और द्वितीय—दोनों विश्व
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को प्रथम और द्वितीय—दोनों विश्वयुद्धों की गहरी जानकारी थी। प्रथम विश्वयुद्ध (1914–1918) के समय वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका और इंग्लैंड में थे, जहाँ उन्होंने युद्ध के कारण बदलती वैश्विक राजनीति, औपनिवेशिक शक्तियों की कमजोरी और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को निकट से समझा। द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–1945) के दौरान वे भारत के एक प्रमुख राष्ट्रीय नेता थे और 1942 से 1946 तक वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में श्रम सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे, जहाँ उन्होंने युद्धकाल में श्रमिकों के अधिकार, काम के घंटे, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए। अपने लेखन और भाषणों में उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वयुद्धों ने औपनिवेशिक व्यवस्था की वास्तविकता उजागर की और भारत जैसे देशों के लिए स्वतंत्रता तथा सामाजिक न्याय की दिशा मजबूत की।



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