संक्षिप्त सारांश – अनुलोम विवाह अखंड भारत में अनुलोम विवाह
संक्षिप्त सारांश – अनुलोम विवाह
अखंड भारत में अनुलोम विवाह हिंदू समाज में वह विवाह है जिसमें उच्च वर्ण का पुरुष निम्न वर्ण की स्त्री से विवाह करता है।
इसे धर्मशास्त्रों में अनुमेय माना गया, जबकि इसके विपरीत प्रतिलोम विवाह (निम्न वर्ण का पुरुष उच्च वर्ण की स्त्री) को निषिद्ध कहा गया।
यह प्रथा वर्ण-व्यवस्था की असमानता पर आधारित थी, क्योंकि निम्न वर्ण (विशेषतः शूद्र) को ऊपर की ओर विवाह करने का अधिकार नहीं था।
इससे समाज में ऊँच-नीच और भेदभाव की भावना बढ़ी।
आधुनिक दृष्टि से, अनुलोम-प्रतिलोम विवाह जैसी व्यवस्थाएँ अमानवीय, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य मानी जाती हैं,
क्योंकि आज संविधान के अनुसार सभी मनुष्य समान हैं।
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