किस तरह से हमारे मूलनिवासी प्राचीन बौद्ध दर्शन सभ्यता संस्कृ
किस तरह से हमारे मूलनिवासी प्राचीन बौद्ध दर्शन सभ्यता संस्कृति इतिहास को पंडित पुरोहित ब्राह्मणों ने काल्पनिक कहानियों में बदला दिया। बोधिसत्व समण पुष्कलावती मैं रहकर अपने अंधे माता-पिता की सेवा करते थे। एक दिन वे अपने अंधे माता-पिता के लिए फल लाने गए थे। तभी एक राजा जो शिकार के लिए निकले समण को अनजाने में बिष-बाण मार दिए। "समण बोधिसत्व" मरे नहीं बल्कि उनका घाव औषधि से ठीक हो गया। माता - पिता की सेवा करनेवाले बोधिसत्व समण की स्मृति में पुष्कलावती मैं स्तूप बना था जिसका जिक्र ह्वेनसांग अपनी बहुचर्चित भारतीय यात्रा वृतांत में करते हैं। यही "बोधिसत्व समण" की कहानी कथा पंडित पुरोहित ब्राह्मणों के "श्रावण बाळ" की कथा के नाम से पुराणों में दर्ज है। यह नक्काशी चीन की पहाड़ियों के गुफाओं में बना है।



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