जो व्यक्ति निम्न जाति में जन्मा है और जिसके कार्य और व्यवहार
जो व्यक्ति निम्न जाति में जन्मा है और जिसके कार्य और व्यवहार को अशुद्ध माना जाता है, उसे छूना नहीं चाहिए और न ही उसे उच्च जातियों के साथ मिलन-जुलन की अनुमति होनी चाहिए। - मनुस्मृति, अध्याय 10, श्लोक 52 "एक महिला को हमेशा अपने परिवार के पुरुषों: पिता, भाई, पति और बेटों पर निर्भर रहना चाहिए। उसे स्वतंत्रता से काम करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।" - #मनुस्मृति, अध्याय 9, श्लोक 3 25 दिसंबर, 1927 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने मनुस्मृति को जलाया था—यह अन्याय का प्रतीक है जिसने भारत में सदियों से दलितों और महिलाओं को दबाया है। लेकिन इस अन्याय के प्रतीक को जलाना जरूरी है—पुस्तक के रूप में और इसके प्रतीक के रूप में, हर दिन, आज भी, भारत की आजादी के 78 साल बाद, हमारे मोहल्लों से लेकर संसद तक इसके अनुयायी मौजूद हैं। आज भी यह भारतीय पूर्वी दर्शन में 78वें बेस्टसेलर की सूची में है।



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"मनुस्मृति एक ग्रन्थ है"
"मनुस्मृति" एक प्राचीन ग्रन्थ है जो भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ग्रंथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक सिद्धांतों का विस्तारक रूप से वर्णन करता है और मनुष्य की जीवनशैली और समाज में न्याय एवं कर्मकाण्ड के मार्गदर्शन करता है। इस ग्रन्थ की विविध सूत्रों में समाज संबंधी न्याय और शास्त्रों के नियमों का उल्लेख है। यह ग्रंथ एक महत्वपूर्ण कानूनी और धार्मिक पुस्तक के रूप में मानी जाती है जो भारत में हिन्दू धर्म के मानक साहित्य में पाया जाता है।
मनुस्मृति एक प्राचीन ग्रंथ है जिसे भारतीय साहित्य और समाज के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह संस्कृत में लिखा गया है और मनुस्मृति नियमित और संगठित जीवन और समाज के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसमें विविध विषयों पर विचार और नियम होते हैं, जैसे वर्णव्यवस्था, समाजिक कर्तव्य, धार्मिक आदर्श और दंडनीति। मनुस्मृति में समाज के संगठन, नैतिकता और न्याय के मूल सिद्धांत बहुत ही विस्तार से वर्णित होते हैं। इस ग्रंथ से हमें हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का ज्ञान मिलता है जो आज के समय में भी महत्वपूर्ण है। मनुस्मृति हमें हमारे प्राचीन संस्कृति और विरासत की महत्वता याद दिलाती है और हमें समाज में समर्पित और उदार मानसिकता के साथ जीने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।