बकास्त आंदोलन बकास्त आंदोलन बिहार में 1930–40 के समय हुआ
बकास्त आंदोलन
बकास्त आंदोलन बिहार में 1930–40 के समय हुआ एक किसान आंदोलन था। यह आंदोलन ज़मींदारों के अत्याचार के खिलाफ शुरू किया गया था। “बकास्त” उस जमीन को कहते थे जिसे ज़मींदार किसानों से छीनकर खुद खेती करने लगते थे।
उस समय ज़मींदार किसानों को उनकी जमीन से जबरदस्ती हटा देते थे। उनसे ज्यादा लगान (tax) लेते थे और कई बार गलत तरीके से पैसे भी वसूलते थे। किसानों के पास अपने अधिकारों की रक्षा करने का कोई मजबूत कानून नहीं था, इसलिए वे बहुत परेशान थे।
इस आंदोलन का नेतृत्व Swami Sahajanand Saraswati ने किया। उनके साथ Karyanand Sharma और Yadunandan Sharma जैसे नेताओं ने भी किसानों का साथ दिया।
किसानों ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपनी जमीन छोड़ने से मना कर दिया और मिलकर विरोध प्रदर्शन किए। कई जगह ज़मींदारों और किसानों के बीच टकराव भी हुआ। यह आंदोलन बिहार के कई इलाकों में फैल गया।
इस आंदोलन का बहुत महत्व था। इससे किसानों में जागरूकता आई और वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगे। आगे चलकर इस आंदोलन के कारण सरकार को भूमि सुधार (land reforms) करने पड़े।
बकास्त आंदोलन किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम था, जिसने उन्हें एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया।



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