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भारत के बैंकों ने 15.27 लाख करोड़ रुपये के बुरे कर्ज (2014-2024) घोषित किए हैं। शीर्ष डिफॉल्टरों में अनिल अंबानी (30 बिलियन रुपये), नीरव मोदी और मेहुल चोकसी शामिल हैं, फिर भी मीडिया विजय माल्या पर ही ध्यान केंद्रित करता है। माल्या पर सार्वजनिक बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये बकाया है, जिसमें से 14,131.6 करोड़ रुपये वसूले गए, जो 6,203 करोड़ रुपये के ऋण वसूली न्यायाधिकरण के फैसले से दोगुना है। भारतीय मीडिया ने माल्या को बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के "चोर" करार दिया, उसके पुनर्भुगतान को अनदेखा किया। क्या उन्होंने कभी एजेंसियों से सवाल किया या दूसरों के भारी-भरकम बकाया कर्ज को कवर किया? नहीं। माल्या की शान-शौकत ने उन्हें टीआरपी का आसान लक्ष्य बना दिया, जबकि मीडिया की जवाबदेही शून्य बनी हुई है। किंगफिशर फिर से उड़ान भरेगा क्योंकि अच्छे दिन लौट रहे हैं!
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